Waqf Bill News:लोकसभा में पास हुआ वक्फ संशोधन बिल, देखे किसने क्या कहा

Waqf Bill News:2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल 2024 पास हो गया। यह बिल लंबे समय से चर्चा में था। सरकार और विपक्ष के बीच इस पर खूब बहस हुई। बहस 12 घंटे से ज्यादा चली। रात करीब 2 बजे वोटिंग हुई। इसमें 288 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट दिया। 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। अब यह बिल राज्यसभा में जाएगा। वहां भी इस पर चर्चा होगी।

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बिल क्या है?

वक्फ संशोधन बिल 2024 वक्फ बोर्ड के नियमों में बदलाव लाने के लिए बनाया गया है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को देखता है। ये संपत्तियां धर्म और दान के लिए होती हैं। पुराना कानून 1995 में बना था। सरकार का कहना है कि उसमें कुछ कमियां थीं। नया बिल इन्हीं कमियों को दूर करेगा। इसे पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के लिए लाया गया है।

सरकार ने क्या कहा?

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल पेश किया। उन्होंने कहा कि यह बिल किसी धर्म में दखल नहीं देता। यह सिर्फ संपत्तियों को ठीक करने के लिए है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी बिल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पुराने कानून में गड़बड़ियां थीं। 2013 में यूपीए सरकार ने वक्फ कानून को सख्त बनाया था। शाह ने कहा कि वह वोट बैंक के लिए था। अब नया बिल इसे सुधारेगा।

उन्होंने एक बात और कही। वक्फ बोर्ड के पास 1913 से 2013 तक 18 लाख एकड़ जमीन थी। लेकिन पिछले 12 साल में 21 लाख एकड़ जमीन और बढ़ गई। शाह ने पूछा कि इतनी जमीन अचानक कैसे बढ़ी? उनका कहना था कि इसमें पारदर्शिता की जरूरत है।

विपक्ष का विरोध

विपक्ष ने बिल का जोरदार विरोध किया। कांग्रेस, सपा और AIMIM जैसे दलों ने इसे असंवैधानिक बताया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह बिल संविधान पर हमला है। उनका कहना था कि यह मुस्लिम समुदाय के अधिकार छीनता है। संविधान के अनुच्छेद 26 में अल्पसंख्यकों को अपने धार्मिक मामले संभालने का हक है। गोगोई ने कहा कि बिल इस हक को कमजोर करता है।

सपा नेता अखिलेश यादव ने भी बिल की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजेपी इसे वोट के लिए लाई है। उनका कहना था कि बीजेपी अपने नाकामियों को छिपाना चाहती है। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिल को फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह मुस्लिमों को अपमानित करने के लिए है।

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बिल में क्या बदलाव हैं?

इस बिल में कई बड़े बदलाव हैं। पहला बदलाव है गैर-मुस्लिम सदस्यों का। अब वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में दो गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे। विपक्ष ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि दूसरे धर्मों के बोर्ड में ऐसा नियम नहीं है।

दूसरा बदलाव है संपत्ति का। अगर कोई सरकारी जमीन वक्फ की बताई जाती है, तो वह अब वक्फ की नहीं रहेगी। जिला कलेक्टर इसकी जांच करेगा। पहले वक्फ ट्रिब्यूनल यह फैसला करता था। अब कलेक्टर का फैसला अंतिम होगा।

तीसरा बदलाव है वक्फ बाय यूजर का। पहले कोई संपत्ति लंबे समय तक धार्मिक काम के लिए इस्तेमाल होती थी, तो वह वक्फ बन जाती थी। अब यह नियम खत्म हो गया।

चौथा बदलाव है दान का। अब सिर्फ वही लोग संपत्ति दान कर सकेंगे, जो 5 साल से इस्लाम मानते हों। विपक्ष ने कहा कि यह नियम नए मुस्लिमों को रोकता है।

बहस में क्या हुआ?

लोकसभा में बहस बहुत गरम रही। सरकार और विपक्ष आमने-सामने थे। किरेन रिजिजू ने कहा कि बिल से किसी के अधिकार नहीं छिनेंगे। उन्होंने कहा कि यह पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए है। अमित शाह ने विपक्ष पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ वोट बैंक के लिए विरोध कर रहा है।

विपक्ष ने बीजेपी पर हमला बोला। गौरव गोगोई ने पूछा कि सरकार ने पहले इस बिल की बात क्यों नहीं की। अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी बिहार चुनाव को देखकर यह बिल लाई है। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी मुस्लिमों को नीचा दिखाना चाहती है।

सहयोगी दलों का रुख

बीजेपी के सहयोगी दलों ने बिल का समर्थन किया। टीडीपी और जेडीयू ने सरकार के साथ वोट दिया। टीडीपी ने एक बदलाव की मांग की थी। उनका कहना था कि पुरानी संपत्तियों को वक्फ में रखा जाए। जेडीयू ने कहा कि इसे पुरानी तारीख से लागू न किया जाए। फिर भी दोनों ने बिल के पक्ष में वोट दिया।

जनता की राय

बिल को लेकर जनता में मिली-जुली राय है। कुछ लोग इसे अच्छा मानते हैं। उनका कहना है कि इससे वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता आएगी। गरीब मुस्लिमों को फायदा होगा। लेकिन कुछ लोग इसे गलत मानते हैं। उनका कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।

दिल्ली में बीजेपी ने बिल के समर्थन में प्रदर्शन किया। विजय चौक और रेल भवन पर लोग जमा हुए। उधर, मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि सरकार उनके अधिकार छीन रही है।

आगे क्या होगा?

अब बिल राज्यसभा में जाएगा। वहां भी 8 घंटे की बहस होगी। बीजेपी के पास राज्यसभा में बहुमत कम है। सहयोगी दलों का साथ जरूरी होगा। अगर वहां बिल पास हो गया, तो यह कानून बन जाएगा।

इतिहास में वक्फ

वक्फ का इतिहास पुराना है। भारत में यह 12वीं सदी से शुरू हुआ। पहले दो गांव दान में दिए गए थे। 1995 में वक्फ कानून बना। 2013 में इसमें बदलाव हुआ। अब 2024 का बिल नया बदलाव लाया है। शाह ने कहा कि 100 साल में 18 लाख एकड़ जमीन वक्फ की थी। लेकिन 12 साल में 21 लाख एकड़ और बढ़ गई। यह सवाल उठता है कि इतनी जमीन कैसे बढ़ी?

विशेषज्ञों की राय

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बिल जरूरी था। वक्फ बोर्ड में गड़बड़ियां थीं। इससे उन्हें ठीक किया जा सकता है। लेकिन कुछ का कहना है कि यह जल्दबाजी में लाया गया। इससे धार्मिक तनाव बढ़ सकता है।

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